गम में डूबा है सरन नगर का चौहान निकेतन तो गमजदा है पूरा शहर। हो भी कैसे ना, नियति ने हमसे हमारा पृथ्वी सिंह जो छीन लिया। वह पृथ्वी जो वायुसेना का एमआई 17 आसमान में उड़ाता तो आगरा गर्वित होता था, जिसकी जाबांजी के किस्से सुन पिता सुरेंद्र फूले नहीं समाते थे और मां सुशीला के हर्ष का पारावार नहीं रहता था। आज वह इतना दूर चला गया। सबको सुबकता छोड़ गया। बस यादें रह गई हैं, जो तस्वीरों में हैं। पिता को गर्व होता है बेटे के साहस पर, लेकिन बेटे की पुरानी तस्वीरें देख गला रुंध जाता है। याद आता है पृथ्वी का वह बचपन, जब वह हेलिकॉप्टर उड़ाने के सपने बुन रहा था। सपने पूरे भी किए, आसमान में उड़ान भरी, देश की सेवा की, पर बुधवार की शाम पिता सुरेंद्र के पास जब बड़ी बेटी ने कॉल कर हादसे की सूचना दी तो, गहरा झटका लगा। एक बार भरोसा नहीं हुआ। पर क्या करते, कोई चारा भी नहीं था। हिम्मत कर परिवार में यह बात साझा की तो, सब गम में डूब गए।
ओ बेटा, ओ मेरा बच्चा
विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान की मां सुशीला का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। बेटियां और आस पड़ोस की महिलाएं उन्हें ढांढस बंधा रही थीं। बेटे के निधन के सदमे में मां के मुंह से बार बार यही शब्द निकल रहे थे, ओ बेटा, ओ मेरा बच्चा। रोते रोते जब सुशीला की हालत तक खराब होने लगी। परिवार के लोग उन्हें किसी तरह संभालने में लगे रहे। बार बार उन्होंने बेड पर लिटाते और कहते चुप हो जाओ, तुम्हारी तबीयत खराब हो जाएगी, लेकिन मां तो मां होती है, कैसे भूले अपने बेटे की यादों को।
अफसोस: 11 घंटे बाद पहुंचा प्रशासन का पहला अधिकारी अफसोस जताने
पापा… ये घड़ी आपके लिए। कभी नहीं रुकेगी। काश! आज इस घड़ी का समय रुक जाए। बेटा… मुझे ऐसी घड़ी नहीं चाहिए। समय तू रुक जा। इतना कहकर विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान के पिता सुरेंद्र सिंह चौहान सिसकने लगते हैं। आसपास के लोग कहते है कि विंग कमांडर पृथ्वी के लिए प्रशासन की ओर से 11 घंटे बाद भी कोई प्रशासनिक अधिकारी संवेदना प्रकट करने नहीं पहुंचा। रात 10:05 मिनट पर प्रशासन की ओर से सबसे पहले एसीएम-2 कृष्मानंद तिवारी पहुंचे। उस घर में आज सन्नाटा पसरा था, जिस घर से आसमान की ऊंची उड़ान के सपने देखने वाली युवा पीढ़ी को सीख दी जा रही थी।
पृथ्वी का फोन स्विच ऑफ मिला तो बढ़ गई धड़कने
दोपहर में पृथ्वी की बड़ी बहन शकुंतला ने टीवी पर हेलीकॉप्टर हादसे में सीडीएस जनरल बिपिन रावत के निधन की खबर देखी तो भाई के नंबर पर कॉल किया तो स्विच ऑफ निकला। इस पर अनहोनी की आशंका पर पृथ्वी की पत्नी कामिनी से संपर्क किया, जिन्होंने पृथ्वी के हेलीकॉप्टर हादसे में शहीद हो जाने की जानकारी दी। यह सुनते ही शकुंतला के पैरों से मानो जमीन खिसक गई। उनके परिजनों ने उन्हें संभाला।
राखी बंधवाने आए थे पृथ्वी, अब किसे बांधूंगी
विंग कमांडर पृथ्वी चार बहनों के इकलौते भाई थे। उनकी दो बहनें आगरा में ही रहती हैं। हेलिकॉप्टर हादसे में निधन की खबर सुनकर बदहवास दौड़ी चलीं आईं बहन मीना की आंखों से आंसू रुक नहीं रहे। मीना ने बताया कि रक्षाबंधन पर पृथ्वी सिंह घर आए थे। तब बहनों ने अपने प्यारे भाई को राखी बांधी। फोन पर वह संपर्क में रहते थे। तीन दिन पहले ही मां सुशीला चौहान की आंख का ऑपरेशन कराने को लेकर पिता से बात हुई थी। पृथ्वी ने आगरा के मिलिट्री हॉस्पिटल में मां के आंख के इलाज के लिए कहा था, लेकिन उससे पहले ही पृथ्वी उनकी आंखों से ओझल हो गए। पिता सुरेंद्र सिंह हाथों में बेटे की तस्वीर लिए सुबकते रहे और बोले कि बेटा बचपन से ही आसमान की ऊंचाईयों को छूना चाहता था। आर्मी स्कूल में दाखिले के बाद एयफोर्स ज्वाइन की। फोन पर मां के इलाज के लिए कहा था।