सरकारी धान के परिवहन में लाखों का घोटाला,कैग की रिपोर्ट में खुलासा

बिलासपुर। समर्थन मूल्य पर किसानों की धान खरीदी के बाद खरीदी केंद्रों से संग्रहण केंद्रों तक परिवहन के लिए ट्रक या फिर बड़ी लॉरी का नहीं बल्कि 190.60 लाख टन मीट्रिक टन ान का परिवहन मोटर साइकिल और बस से किया गया है। वर्ष 2015 में राज्य सरकार ने समर्थन मूल्य पर किसानों का धान खरीदा था। खरीदी केंद्रों से संग्रहण केंद्रों तक धान के परिवहन के लिए राज्य शासन ने स्थानीय स्तर पर निविदा जारी करने का निर्देश भी दिया था। निविदा के बाद ट्रक व बड़े लॉरी मालिकों को धान परिवहन का ठेका भी दिया था।

धान उठाव के एवज में राज्य शासन ने ट्रक मालिकों को लाखों रुपए का भुगतान भी किया है। शासन स्तर पर प्रदेशभर के खरीदी केंद्रों से ट्रकों के जरिए धान का परिवहन होना बताते हुए पूरी रिपोर्ट तैयार कर फाइल बंद कर दिया। कैग ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है कि राज्य शासन की विभिन्न सरकारी एजेंसियों ने धान परिवहन की आड़ में लाखों रुपए का वारा-न्यारा कर दिया है।

कैग ने खुलासा किया है कि मार्कफेड ने 190.60 लाख टन धान का परिवहन करने के साथ ही भुगतान भी कर दिया है। कैग ने जब बारिकी से अध्ययन किया तब पता चला कि जिस वाहन नंबर को ट्रक या फिर लॉरी का होना बताया है वह बाइक,बस,पेट्रोल टेंकर के अलावा कार, डिलीवरी वेन और कैब का निकला।

आरटीओ ने फर्जीवाड़ा का किया भांडाफोड़

कैग के अफसरों को वाहन नंबर देखकर संदेह हुआ। तब अपने स्तर पर अकिारियों ने आरटीओ के जरिए वाहन नंबर देकर इस बात की जानकारी मांगी कि संबंति नंबर किस वाहनों का है। आरटीओ ने जब नंबर के साथ वाहनों का खुलासा किया तो अफसरों के भी होश उड़ गए कि मार्कफेड के अकिारियों ने बाइक का नंबर देकर ट्रक के जरिए परिवहन करना बताते हुए लाखों स्र्पये हड़प लिए ।

2.63 करोड़ का अतिरिक्त भार इसलिए पड़ा

कैग ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का भी स्पष्ट तौर पर खुलासा किया है कि ान का उठाव निकटतम खरीदी केंद्रों से संग्रहण केंद्रों के लिए न किए जाने के कारण राज्य शासन को परिवहन शुल्क का अतिरिक्त भार पड़ा। कैग ने इसके लिए मार्कफेड को जिम्मेदार ठहराया है। इसके चलते राज्य शासन को 2.63 करोड़ स्र्पये का अतिरिक्त परिवहन शुल्क का भार वहन करना पड़ा।

नान घोटाले की सीबीआइ जांच की मांग को लेकर हमने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। बहस के दौरान हमने धान खरीदी से लेकर परिवहन और कस्टम मिलिंग के दौरान पूर्ववर्ती सरकार ने किस तरह से गड़बड़ी की है । कैग की रिपोर्ट को आंकड़ेवार डिवीजन बेंच के समक्ष रखा है। – सुदीप श्रीवास्तव, वकील सुप्रीम कोर्ट व याचिकाकर्ता

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *