जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्थित लाइब्रेरी में पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं ने दिल्ली पुलिस पर आंसू गैस के गोले छोड़ने और लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की अनुमति के बगैर दिल्ली पुलिस कैंपस से होते हुए लाइब्रेरी पहुंची, जहां सौ से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे थे।
छात्रों के मुताबिक, पुलिस ने शौचालयों में जाकर भी लाठीचार्ज किया। इसमें कई छात्रों को गंभीर चोट आई है। अचानक हुए हमले से घबराए विद्यार्थी इधर-उधर भागने लगे। छात्र-छात्राएं लाइब्रेरी के ऊपरी मंजिल की ओर भागे, लेकिन यहां भी आंसू गैस के चलते छात्रों ही हालत खराब हो गई।
कई छात्र लाइब्रेरी की खिड़की के शीशे तोड़कर बाहर निकले। क्योंकि, मुख्य गेट पर पुलिस आंसू गैस के गोल बरसा रही थी। छात्रों का कहना है कि उन्होंने लाइब्रेरी के वीडियो भी बनाए हैं। छात्राओं ने सोशल मीडिया पर ऑडियो और वीडियो अपलोड कर विश्वविद्यालय प्रशासन और दिल्ली पुलिस आयुक्त से मदद मांगी।
इसी से विश्वविद्यालय प्रशासन को लाइब्रेरी में पुलिस के आंसू गैस और लाठीचार्ज की जानकारी मिली। उन्होंने तुरंत पुलिस अधिकारियों से कैंपस से बाहर जाने का आदेश दिया।
छात्रों का यह भी आरोप है कि वह लाइब्रेरी से घर जाने के लिए दोनों हाथ ऊपर करके निकले। छात्र छात्राओं के साथ रहे, ताकि पुलिस उन पर लाठीचार्ज न कर सके। बावजूद इसके, लाठीचार्ज किया गया। इसके साथ ही दूसरी बार विश्वविद्यालय प्रशासन ने दिल्ली पुलिस आयुक्त से बिना अनुमति कैंपस में छात्रों पर आंसू गैस और लाठीचार्ज करने पर आपत्ति जताई है।
बिना अनुमति कैंपस में घुसी पुलिस: चीफ प्रोक्टर
जामिया के चीफ प्रोक्टर वसीम अहमद खान ने आरोप लगाया कि पुलिस बिना अनुमति कैंपस में घुसी और शिक्षकोें व पढ़ाई कर रहे छात्रों को पीटा व उन्हें वहां से बाहर निकाल दिया। विश्वविद्यालय की वीसी नजमा अख्तर ने घटना की निंदा करते कहा कि जो छात्र लाइब्रेरी में थे, उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।
