चार माह में 200 अर्जियां, फिर भी नहीं मिला इंसाफ, अब दुष्कर्म पीड़िता ने खुद को लगाई आग

उन्नाव जिले के बिहार थाना क्षेत्र में दुष्कर्म पीड़िता को आग से जलाने की वारदात के 12वें दिन उन्नाव फिर से सुर्खियों में आ गया है। हसनगंज थाना क्षेत्र में रिपोर्ट दर्ज करने के बाद दुष्कर्म के आरोपी को अग्रिम जमानत हासिल करने के लिए पुलिस की ओर से मौन छूट दे दी गई। आरोपियों को अग्रिम जमानत मिलने से आहत दुष्कर्म पीड़िता ने सोमवार सुबह एसपी कार्यालय के गेट पहुंचकर खुद पर केरोसिन डालकर आग लगा ली। लपटों से युवती को घिरा देख पुलिसकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए।

आनन-फानन में आग पर काबू पाकर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर ने 70 फीसदी जलने की पुष्टि कर पीड़िता को कानपुर हैलट रेफर कर दिया। हसनगंज कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी 22 वर्षीय युवती ने सोमवार सुबह 11 बजे एसपी कार्यालय गेट पर खुद को आग लगा ली। युवती के पिता का आरोप है कि उसके घर से 300 मीटर दूरी पर रहने वाला युवक शादी का झांसा देकर कई साल से उसका शारीरिक शोषण कर रहा था।

शादी की बात कहने पर उसने इंकार कर दिया। कोतवाली पुलिस के साथ डीएम और एसपी को कई शिकायती पत्र दिए पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस की छूट मिलने से 30 सितंबर 2019 को आरोपी अपने भाई, भाभी व एक अन्य परिवार के युवक के साथ उसके घर घुस गया और परिवार को जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने दो दिन बाद आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की।

आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करने की जगह गिरफ्तारी स्टे लाने और बाद में अग्रिम जमानत कराने की छूट दे दी। शनिवार 28 नवंबर 2019 को लखनऊ उच्च न्यायालय से सभी आरोपियों को अग्रिम जमानत मिल गई। जमानत मिलने के बाद शनिवार 14 दिसंबर की देर शाम आरोपियों ने मोहल्ले में मिठाई बांटी और उसे व उसके परिवार को धमकी दी। जिससे आहत हो आत्महत्या का फैसला लेते हुए उसने सोमवार सुबह एसपी कार्यालय गेट पर आग लगा ली।

एसपी विक्रांतवीर अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ जिला अस्पताल पहुंचे और उससे घटना की जानकारी ली। एसपी ने बताया कि युवती के पिता की तहरीर पर मुख्य आरोपी के खिलाफ युवती को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने की रिपोर्ट दर्ज उसे गिरफ्तार किया गया है।

चार माह में दिए 200 से अधिक प्रार्थनापत्र 
दुष्कर्म पीड़िता की मां ने बताया कि सितंबर माह से अब तक इंसाफ के लिए उनकी बेटी 200 से अधिक प्रार्थनापत्र पुलिस और लखनऊ के उच्चाधिकारियों के साथ नेताओं को दे चुकी है। लेकिन किसी ने उसकी एक नहीं सुनी। हर बार पुलिस की मर्जी चली और आरोपियों के हौसले बुलंद होते रहे।

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