रायपुर। नगरीय निकाय चुनाव में इस बार सरकार ही नहीं विपक्ष की भी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। छत्तीगसढ़ में भाजपा के सत्ता से बाहर होने और कांग्रेस की सरकार बनने के बाद यह पहला नगरीय निकाय चुनाव है। कांग्रेस अपनी सरकार के काम के दम पर मैदान में उतरी है, तो विपक्ष अपने पिछले 15 साल के विकास और सरकार की असफलता को मुद्दा बनाकर ताल ठोंक रही है। कांग्रेस और भाजपा के साथ इस बार जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने भी अधिकांश नगरीय निकायों में अपने उम्मीदवार उतारकर मैदान में मुकाबले को रोचक बनाया दिया है। दलों के उम्मीदवारों के साथ बागियों ने प्रदेश की करीब 20 फीसदी सीट पर मुश्किल पैदा की है।
रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव, दुर्ग और अंबिकापुर नगर निगम में कांग्रेस और भाजपा के बागी महापौर तय करने के लिए निर्णायक भूमिका में आ सकते हैं। कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद स्थानीय स्तर का यह पहला चुनाव है। इससे पहले हुए आम चुनाव में सत्तास्र्ढ़ कांग्रेस को झटके लगे थे, जबकि विधानसभा के दो उपचुनाव में प्रमुख विपक्षी भाजपा को मुंह की खानी पड़ी थी।
सभी दल अपनी जीत के दावे कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर मतदाताओं की चुप्पी सभी के माथे पर पसीना ला रहा है। हालांकि कांग्रेस और भाजपा ने बागियों पर डंडा चलाते हुए संगठन से बाहर का रास्ता दिखाया है। वहीं, कुछ बागी मैदान छोड़कर पार्टी के पाले में भी आ गए। अब देखना है कि शहरी सत्ता सौंपने के लिए वोटरों का स्र्झान किसके पक्ष में आता है।
कांग्रेस ने चुनाव से ठीक पहले पिछले चुनाव परिणाम से बेहतर रिजल्ट आने का दावा किया है। मंत्री मोहम्मद अकबर ने राजीव भवन में पत्रकारों से चर्चा में कहा कि पिछले चुनाव में जब कांग्रेस सत्ता से बाहर थी और उसे वोटरों को देने के लिए कुछ नहीं था, उस समय बेहतर परिणाम आए। कांग्रेस छह नगर निगम, 20 नगर पालिका और 52 नगर पंचायत में जीत दर्ज की है।
एक साल में सरकार ने बहुत से काम किए हैं, जिससे जनता का भरोसा बढ़ा है। अकबर ने कहा कि धान खरीदी का मुद्दा कुछ नगर पंचायत में असर दिखाएगा। भाजपा केंद्र के पत्र को भुनाने की कोशिश में है, लेकिन जनता जानती है कि कांग्रेस के प्रयास से चावल की खरीदी करने का केंद्र सरकार ने निर्णय लिया है। वोटर बागियों के पक्ष में नहीं आएगी, क्योंकि उनको पता है कि विकास कांग्रेस सरकार कर रही है और वे कांग्रेस उम्मीदवार को वोट करेंगे।
विकास के नाम पर एक ईंट नहीं रख पाए : उसेंडी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी ने कहा कि एक साल के अपने कुशासन का खामियाजा कांग्रेस इस बार उठाना पड़ेगा। कांग्रेस सरकार ने प्रदेश के लोगों को छलने और ठगने का काम किया। जनता के कल्याण व प्रदेश के सर्वांगीण विकास के काम को छोड़कर फिजूल की राजनीतिक नौटंकियों में अपना वक्ता जाया किया।
सत्ता के अहंकार में मुख्यमंत्री, मंत्री और कांग्रेस के नेताओं की बेकाबू भाषा ने प्रदेश की संवेदनाओं के साथ-साथ संवैधानिक पदों की गरिमा को तार-तार किया है। धोखाधड़ी, छलावा, वादाखिलाफी और झूठ-फरेब की मिसाल बन चुकी कांग्रेस निकाय चुनावों में अब मतदाताओं के सामने जाने का नैतिक साहस ही नहीं जुटा पाई। विकास के नाम पर एक ईंट तक मौजूदा कांग्रेस सरकार नहीं रख पाई, उल्टे भाजपा शासन के स्वीकृत विकास कार्यों को रोककर उनमें अड़ंगा डाला।
