रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सुबह आठ बजकर 15 मिनट से 11 बजकर 15 मिनट के बीच कुल तीन घंटे सूर्यग्रहण का नजारा राजधानी रायपुर में रहा। बदली और बारिश के चलते यहां इसकी दृष्यता 58 फीसद रही। सुबह 9 बजकर 40 मिनट से 10 सेकंड के लिए यहां सूर्यग्रहण का नजारा दिखाई दिया। जबकि कुल 3 घंटे इसका प्रभाव रहा। विज्ञान सभा द्वारा नगर निगम गार्डन में तीन टेलीस्कोप के साथ-साथ सौर चश्मे के जरिए लोगों को यह नजारा दिखाने की तैयारी की गई थी, हालांकि मौसम के बदले स्र्ख के चलते यहां इस तरह सूर्यग्रहण के नजारे को अनुभव कर पाना संभव नहीं हो पाया। बड़ी तादात में इसे अनुभव करने के लिए यहां लोगों की भीड़ जुटी थी, लेकिन लोगों को निराश हुई।
विज्ञान सभा से जुड़े खगोल वैज्ञानिक लक्ष्मीकांत चौरे ने बताया कि सूर्य ग्रहण को लेकर लोगों में कई तरह की भ्रांतियां हैं, लेकिन यह एक प्राकृतिक घटना है। थोड़ी सी सावधानी अपना कर इस घटना और नजारे को देख सकते हैं। हमारी संस्था इस तरह की खगोलीय घटनाओं से लोगों को रू-ब-रू होने में मदद करती है साथ ही लोगों में जागरूकता के लिए काम कर रहे हैं। मौसम में खराबी आने की वजह से हमारे द्वारा की गई व्यवस्था काम नहीं कर सकी, लेकिन लंबे समय में घटित होने वाली इस तरह की खगोलीय घटना हर एक व्यक्ति को प्रभावित करती हैं। इन्हे अनुभव करना बेहद रोचक होता है।
जागरूकता के लिए हुए कार्यक्रम
ऐसी भ्रांति लोगों में है कि सूर्य ग्रहण के वक्त भोजन नहीं करना चाहिए, लेकिन वैज्ञानिक इसे गलत मानते हैं। इसी भ्रांति को तोड़ने के लिए विज्ञान सभा के सदस्यों ने वहां मौजूद लोगों के लिए समोसे का प्रबंध किया था। लोगों ने इस दौरान समोसे खाए और मन में बनी पुरानी भ्रांति को तोड़ा। पर्यावरण वैज्ञानिक वाईके सोना ने बताया कि अब लोगों में इस तरह की धारणाओं में बदलाव आ रहा है। लोग जागरूक हो रहे हैं और इस तरह की घटनाओं को अनुभव कर रहे हैं।
सूर्य ग्रहण के मौके पर नगर निगम गार्डन में आयोजित खास कार्यक्रम में बच्चों ने सूर्यग्रहण थीम पर पेंटिंग बनाई। रंग-बिरंगी पेंटिंग में इस खगोलीय नाजरे को बच्चों ने कैद किया। इसके साथ ही सूर्य ग्रहण की घटना को समझने के लिए बच्चों ने खुद अलग-अलग ग्रह-उपग्रह और पिंड बनकर नाटक के जरिए इसे प्रदर्शित किया।
एक अनूठी प्राकृतिक घटना
पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में भी इस नजारे को अनुभव करने के लिए छात्रों के लिए चार टेलीस्कोप की व्यवस्था की गई थी। यहां भी मौसम में बदली की वजह से व्यवस्था सफल नहीं हो पाई। खगोलशास्त्री नंदकुमार चक्रधारी ने बताया कि सूर्यग्रहण को लेकर तमाम पुरानी धारणाएं सिर्फ भ्रांतियां हैं। छात्रों को भी इस बारे में वैज्ञानिक तर्क के साथ जानकारी दी जा रही है, ताकि वे जागरूक हों और दूसरों को भी इन खगोलीय घटनाओं का महत्व समझा सकें।
