गुजरात के सूरत में एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। इसके मुताबिक, शहर में नाबालिग बच्चियों के साथ हो रही दुष्कर्म की घटनाओं में 80 प्रतिशत आरोपी पड़ोसी, रिश्तेदार या परिचित पाए गए हैं। पुलिस के अनुसार बच्चियों को सबसे ज्यादा खतरा उसके आस-पास के रहने वाले सगे-संबंधियों से होता है।
सूरत में लोगों को इस विषय पर जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। शहर के अलग-अलग थानों में दर्ज नाबालिग बच्चियों से दुष्कर्म, अपहरण के मामलों में अब तक जितने भी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है उनमें से सबसे ज्यादा संख्या परिचितों की है। पिछले तीन महीने में पुलिस अभियान चलाकर करीब आठ लाख 50 हजार लोगों को जागरूक किया गया है।
पुलिस ने इस अभियान के तहत अब तक 500 से ज्यादा सोसाइटियों और स्कूलों में जाकर आठ लाख 50 हजार लोगों को जागरूक कर चुकी है। साथ ही हिंदी, गुजराती, उड़िया, मराठी और अंग्रेजी में पम्पलेट भी बांट रही है।
पुलिस कमिश्नर आरबी ब्रह्मभट्ट ने बताया कि नाबालिग बच्चियों के साथ इस तरह के घिनौने अपराध हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने बताया कि हमने सभी थानों में लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया है। दूसरी ओर, अभियान को आगे बढ़ाने वाली डीसीपी विधि चौधरी ने बताया कि मांओं को चाहिए कि वह अपनी नाबालिग बच्चियों को समझाएं। उन्हें अच्छाई-बुराई से अवगत कराएं।
चार मामलों में आरोपी पिता और भाई
पिछले 21 महीने में थाने में दर्ज 24 नाबालिग बच्चियों से दुष्कर्म करन के मामले में 18 आरोपी पड़ोसी और रिश्तेदार निकले, जबकि छह मामलों में बच्चियों को चॉकलेट का लालच देकर दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया। आश्चर्य की बात यह है कि जोन-तीन में वर्ष 2012 से 2019 तक 348 मामले सामने आए हैं, जिसमें 257 मामलों में आरोपी पड़ोसी और परिचित हैं। चार मामलों में आरोपी पिता और भाई तो 87 मामलों में आरोपी अज्ञात व्यक्ति है।
