प्रदेश में 10 करोड़ की रजिस्ट्रियां अटकी
रायपुर छत्तीसगढ़ के रजिस्ट्री कार्यालयों में बुधवार को ताला लटका रहा. प्रदेश के सभी 28 जिलों के रजिस्ट्री अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर कलमबंद हड़ताल किया और किसी भी कार्यालय में काम नहीं हुआ, जिससे पूरे प्रदेश भर में रोजाना होने वाली करीब 2 हजार रजिस्ट्री नहीं हो पाईं, जिससे शासन को मिलने वाले लगभग 10 करोड़ रुपयों का राजस्व अटक गया है. रजिस्ट्री कराने के लिए जो लोग पहुंच रहे थे, उन्हें भी परेशानी का सामना करना पड़ा. रजिस्ट्री कार्यालय के अधिकारियों, कर्मचारियों ने रायपुर के बूढ़ा तालाब धरनास्थल में प्रदर्शन किया. रजिस्ट्री अधिकारी, कर्मचारी संघ के सचिव वीरेन्द्र श्रीवास का कहना है कि 20 सालों से वे लोग लगातार वेतन विसंगति दूर करने, राजपत्रित अधिकारी का दर्जा देने और पदोन्नति की मांग कर रहे हैं. बावजूद इसके सरकार ने ध्यान नहीं दिया। यही कारण है कि इतने सालों में पहली बार वे लोग काम बंद करके हड़ताल कर रहे हैं।
अब काली पट्टी लगाकर विरोध
संघ के अध्यक्ष योगेश शुक्ला का कहना है कि उनकी मांगों पर सरकार ने अगर ध्यान नहीं दिया तो कल 5 मार्च से लेकर 15 मार्च तक काली पट्टी बांधकर विरोध जताएंगे. साथ ही निर्धारित समय 10.30 से 05.30 बजे तक ही काम करेंगे. इसके बाद भी अगर ध्यान नहीं दिया गया तो उसके बाद अनिश्चतकालीन हड़ताल पर भी जा सकते हैं. वहीं रजिस्ट्री आफिस में रजिस्ट्री कराने पहुंचे लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बिलासपुर से रजिस्ट्री कराने रायपुर पहुंचे गणेश राम देवांगन का कहना है कि वे सुबह से निकलकर रजिस्ट्री कराने रायपुर पहुंचे हैं, लेकिन यहां अधिकारियों के हड़ताल पर होने की नोटिस चस्पा है। वे अपनी दुकान बंद करके रायपुर आए हैं।
सहायक शिक्षक फेडरेशन के बाद अब संयुक्त प्रगतिशील कर्मचारी ने भी आंदोलन के संकेत दिये हैं। संयुक्त प्रगतिशील कर्मचारी महासंघ ने 8 फरवरी को कर्मचारियों को बड़ी बैठक रायपुर में बुलायी है, जिसमें आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जायेगी। प्रदेश अध्यक्ष गोपाल प्रसाद साहू ने आरोप लगाया है कि सरकार ने अनियमित कर्मचारी के नियमितिकरण का वादा किया था, वहीं अनियमित कर्मचारी को बहाल करने, छंटनी नहीं किये जाने, आउटसोर्सिंग बंद करने का वादा किया था, लेकिन कर्मचारियों के वादों पर बजट में थोड़ा भी ध्यान नहीं दिया गया। महासंघ का कहना है कि 10 दिन के भीतर कर्मचारी हित में बड़े निर्णय का वादा किया गया था, लेकिन आज तक उस दिशा में कार्रवाई नहीं की। जबकि सरकार ने पिछली फरवरी में कहा था कि ये साल किसानों का है, अगला साल कर्मचारियों का होगा। इस ऐलान ने कर्मचारियों को उत्साह से भर दिया था। लेकिन उस ऐलान पर अमल नहीं किया गया। बजट में प्रावधान नहीं किये जाने के बाद अब नाराज महासंघ ने 8 मार्च को बैठक बुलायी है, जिसमें 60 से अधिकार अनियमित संगठनों से सलाह मशविरा कर निर्णय लिया जायेगा। रायपुर कलेक्टरेट गार्डन में होने वाली इस बैठक में नौकरी की सुरक्षा मुहिम को रफ्तार देने पर निर्णय लिया जायेगा। कर्मचारियों ने विधानसभा घेराव, भूख हड़ताल, अनिश्चितकालीन हड़तान व धरना प्रदर्शन को लेकर 8 मार्च को बड़ी रणनीति बना सकती है।
