नई दिल्ली: इस साल यानी 2020 की ईद ने पिछले सालों से कई बदलाव हुए हैं। ऐसे में खुशियों के इस पर्व में लोग सारी सावधानियां बरतते हुए भी इस पर्व को खुशी से मना रहे है। साल भर के इस पर्व का सभी को बेस्रबी से इंतजार रहता है। रमजान के पाक महीने में 30 दिनों तक रोज़ा रखने के बाद अल्लाह अपने बंदे को ईनाम के रूप में ईद उल फित्र जैसा त्योहार देता है। फिर इसके बाद चाँद के दीदार होने के बाद इस पर्व को मनाया जाता है।
गिल-शिकवे भूलकर नए सिरे से जिंदगी
आपको एक खास बात बताएं, यह मौका इश्क़ करने वालों के लिए बहुत कीमती होता है। चाँद में अपने महबूब को तलाशना और फिर उसे याद करना एक खूबसूरत एहसास होता है। यह दिन खुशियों वाला है, एक दूसरे को मुबारक़बाद देने वाला है। लोग सारे गिल-शिकवे भूलकर नए सिरे से जिंदगी शुरू करते हैं। तो चलिए बताते है कि हम आपके लिए क्या लाए हैं।
जीं हां आपके लिए ईद पर कुछ बेहतरीन चुनिंदा शानदार शायरी लाये है, जिनके जरिए आप अपने दिल के एहसास को बयां कर सकते हैं।
है ईद का दिन आज तो लग जाओ गले से
जाते हो कहाँ जान मिरी आ के मुक़ाबिल
-मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
कहते हैं ईद है आज अपनी भी ईद होती
हम को अगर मयस्सर जानाँ की दीद होती
-ग़ुलाम भीक नैरंग
ईद का दिन है गले आज तो मिल ले ज़ालिम
रस्म-ए-दुनिया भी है मौक़ा भी है दस्तूर भी है
-क़मर बदायुनी
तुझ को मेरी न मुझे तेरी ख़बर जाएगी
ईद अब के भी दबे पाँव गुज़र जाएगी
ज़फ़र इक़बाल
तुम बिन चाँद न देख सका टूट गई उम्मीद
बिन दर्पन बिन नैन के कैसे मनाएँ ईद
-बेकल उत्साही
महक उठी है फ़ज़ा पैरहन की ख़ुशबू से
चमन दिलों का खिलाने को ईद आई है
-मोहम्मद असदुल्लाह
उस से मिलना तो उसे ईद-मुबारक कहना
ये भी कहना कि मिरी ईद मुबारक कर दे
-दिलावर अली आज़र
ऐ हवा तू ही उसे ईद-मुबारक कहियो
और कहियो कि कोई याद किया करता है
-त्रिपुरारि
जिस तरफ़ तू है उधर होंगी सभी की नज़रें
ईद के चाँद का दीदार बहाना ही सही
-अमजद इस्लाम अमजद
