शिक्षका एक साथ करीब 25 स्कूलों में पढ़ा रही थी। यही नहीं उसको सैलरी के रूप में 1 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया गया। यह घोटाला उस समय पकड़ में आया जब शिक्षकों का एक डेटाबेस बनाया जा रहा था।
लखनऊ: यूपी की कासगंज पुलिस ने एक फ़र्ज़ी शिक्षिका को उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वह अपने साथी के साथ बीएसए ऑफिस में अपना इस्तीफा देने पहुंची थी। शिक्षिका पर आरोप है कि उसके डॉक्यूमेंट पर प्रदेश के कई कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में एक साथ फर्जी तरीके से कई लोग नौकरी कर रहे हैं।
शिक्षिका अनामिका शुक्ला की गिरफ्तारी पर बीएसए कासगंज अंजली अग्रवाल ने बताया कि राज्य परियोजना कार्यालय लखनऊ के मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक द्वारा पत्र आया था, जिसमें ऐसा प्रकरण संज्ञान में आया था कि अनामिका शुक्ला पुत्री सुभाष चंद्र शुक्ला के डॉक्यूमेंट पर कई जनपदों में अलग-अलग लोग कस्तूरबा विद्यालय में कार्य कर रहे हैं। जिसमें हमारे जनपद का भी नाम था। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय फरीदपुर में यह कार्यरत थी इनको नोटिस जारी किया था, जिसके क्रम में यह यहां त्यागपत्र देने आई थी तो हमने इन्हें पुलिस के सुपुर्द कर दिया है।
क्या था मामला
शिक्षका एक साथ करीब 25 स्कूलों में पढ़ा रही थी। यही नहीं उसको सैलरी के रूप में 1 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया गया। यह घोटाला उस समय पकड़ में आया जब शिक्षकों का एक डेटाबेस बनाया जा रहा था। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) में काम करने वाली टीचर अंबेडकर नगर, बागपत, अलीगढ़, सहारनपुर और प्रयागराज जैसे जिलों के कई स्कूलों में एक साथ काम कर रही थीं। मानव सेवा पोर्टल पर शिक्षकों के डिजिटल डेटाबेस में शिक्षकों के व्यक्तिगत रिकॉर्ड, जुड़ने और पदोन्नति की तारीख की आवश्यकता होती है।
रिकॉर्ड अपलोड होने के बाद यह पाया गया कि अनामिका शुक्ला नाम की टीचर एक साथ 25 स्कूलों में सूचीबद्ध थीं। केजीबीवी कमजोर वर्गों की लड़कियों के लिए चलाया जाने वाला एक आवासीय विद्यालय है, जहां शिक्षकों को अनुबंध पर नियुक्त किया जाता है। उन्हें प्रति माह लगभग 30,000 रुपये का भुगतान किया जाता है। जिले के प्रत्येक ब्लॉक में एक कस्तूरबा गांधी स्कूल है।
