भारत के खिलाफ चाणक्‍य की यह नीति अपना रहा है चीन

नई दिल्‍ली: लद्दाख में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ा हुआ है। दोनों ही देशों के बीच आज एक बार फिर इस विवाद को सुलझाने के लिए बैठक हुई, लेकिन वह‍ बेनतीजा रही। ऐसे में जानकारों का कहना है कि चीन मनोवैज्ञानिक रूप से वार जोन कंसेपट (WZC) के सिद्धांत पर काम करते हुए भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। इसे मनोवैज्ञानिक ऑपरेशन (Psy Ops) भी कहा जाता है।

जानकारों की मानें तो यह चाणक्य और सूर्य त्ज़ु के समय की एक पुरानी अवधारणा है, जिसपर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) ने काम कर रही है ताकि भारत पर दबाव बनाया जा सके। इस तरह की रणनीति के तहत सोशल मीडिया या अपने प्रभाव को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाकर लोगों को प्रभावित किया जाता है ताकि विपक्षी सैनिकों और राजनीतिक निर्णय निर्माताओं के मनोबल को कम किया जा सके।

इस रणनीति के तहत तहत चीन ने भारत के भीतर राजनीतिक मनमुटाव को बढ़ाने व युद्ध करने की उसकी क्षमता पर संदेह पैदा करने के लिए ग्राउंड पोजिशन मैप्स और वीडियो लीक किए हैं। वह भारत के खिलाफ तैनात हथियार प्रणालियों की जानकारी आधिकारिक मीडिया के माध्यम से प्रसारित कर रहा है, भले ही वह थिएटर हथियार हो जाकि कभी जंग के लिए टेस्‍ट ही ना किए गए हों। ऐसा करके वह भारत को दशहत में डाला चाहता है ताकि बातचीत करने की उसकी क्षमता कमजोर हो जाए।

73-दिन के डोकलाम विवाद की तरह ही चीनी ऑर्मी पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो और गैलवान नदी पर चल रहे तनाव में भारतीय संकल्प को कमजोर करने के लिए अपनी पुरानी रणनीति अपना रहा है। इसके लिए चीन युद्ध को एक रंगमंच बनाते हुए तकनीक के माध्यम से इसे पूरी तरह से पारदर्शी बनाने में लगा है। चीन ने गलत सूचना देते हुए लोगों के दिमाग को संकोड़ने का काम किया है, ताकि वह उसकी द्वारा दिखाई जा रही छवि को ही सही माने। इसके लिए वह विशाल सेना की तैनानी करने में लगा हुआ है ताकि भारत को युद्ध का खतरा दिखाया जा सके।

ऐसे बना रहा है भारत पर दबाव

हाल ही में एक टोही हेलीकॉप्टर ड्रोन को गोली मारने का वीडियो चीन की तरफ से जारी किया गया। इसके साथ ही चीनी ऑर्मी के द्वारा पूर्वी लद्दाख में नवीनतम तोपों और मिसाइलों को तैनात करने के बारे में प्रचार किया गया। इसके साथ ही यह भी बताया गया कि उसकी टक्‍कर के हथियार भारत के पास नहीं है। PLA की तरफ से बताया गया कि उसके बाद बेहतर स्‍वदेशी ड्रोन हैं, जबकि सच्‍चाइ्र यह है कि भारत ने इजरायल से जो ड्रोन लिए हुई हे, चीनी ड्रोन उनके सामने कहीं नहीं टिकते।

इसके साथ ही दोनों देशों की वायु सेना समान रूप से रूसी सुखोई-30 का उपयोग करते है। भारतीय वायु सेना इन्‍हें मार्क इंडिया (MKI) और PLA वायु सेना, मार्क चीन (MKC) कहती है। चीन के दो एयरक्राफ्ट कैरियर टॉम-टोइंग होने के बावजूद भारतीय वाहक आधारित नौसैनिक विमानन कुछ चुनिंदा क्षेत्रों को छोड़कर उससे मीलों आगे है।

Psy-Ops का दूसरा पहलू
Psy-Ops का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है, बातचीत के माध्यम से उम्मीद पैदा करना और फिर इसे जनता के बीच मोहभंग की ओर ले जाना। यह स्पष्ट है कि पूर्वी लद्दाख में मौजूदा गतिरोध के समाधान के लिए छोटे मगर वृद्धिशील कदमों के साथ जुड़ाव की आवश्यकता होगी। दोनों तरफ भारी तैनाती को देखते हुए प्रत्येक पक्ष यथास्थिति बहाल होने से पहले एक-दूसरे से रियायतों की तलाश करेगा।

3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हावी होने के चीनी प्रयासों द्वारा दोनों पक्षों के राजनयिकों या जनरलों के बीच सामंजस्य बैठाना भी बहुत मुश्किल होगा। हालांकि चीन ने भारत की तुलना में सीमा अवसंरचना को उन्नत किया। जिसके बाद अब नई दिल्ली भी पूर्वी, मध्य और पश्चिमी क्षेत्र में गश्त की जगहों लिए रणनीतिक सड़कों का निर्माण तेजी से कर रहा है।

सपाट तिब्बती पठार की तुलना में एक कठिन हिमालय क्षेत्र का सामना करने के बाद भारत निश्चित रूप से चीनी सैन्य लाभ को कम करने में लगा हुआ है। जिसके बाद पूर्वी लद्दाख में गतिरोध और पीएलए के जुझारूपन को इस संदर्भ में समझा जाना चाहिए।

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