फिल्म चमन-बहार का गाना- “एकंतारतीक पारिहार बारचार…” के बारे में पूरी जानकारी इस लेख में पढ़िए

कुडुख, छत्तीसगढ़ में बोली जाने वाली एक बोली है। यह छत्तीसगढ़ी नहीं है, उसकी सखी-सहेली है। छत्तीसगढ़ के अलावा यह झारखंड में भी बोली जाती है। पश्चिम बंगाल में भी। यह द्रविड़ भाषा परिवार की विशुद्ध जनजातीय बोली है, जो उरांव समाज में प्रचलित है। इस बोली के इतने बड़े भूगोल और समाजशास्त्र के बाद भी लोग इसके बारे में नहीं जानते। इसने अपनी गठरी में जो कीमती लोक-साहित्य सहेज रखा है, उसके बारे में नहीं जानते।

मेरी तरह अर्थ बहुतों को पता नहीं। लेकिन मांदर की थाप की याद दिलाता चमनबहार का गीत सबके हृदय को चीथ रहा है। आह और वाह से यूट्यूब का कमेंट सेक्शन अटा पड़ा है। मेरी तरह बहुत से लोग इन शब्दों को पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं, इनके मायने तलाश रहे हैं। पूछ रहे हैं- क्या यहां छत्तीसगढ़ से कोई है ? क्या कोई हमें समझा पाएगा कि क्या कहा जा रहा है ?क्या यह छत्तीसगढ़ी है ?

नहीं, यह छत्तीसगढ़ी नहीं है। और न ही पूरा का पूरा थीम सांग कुडुख है। इसका दूसरा अंतरा हल्बी में है। हल्बी भी छत्तीसगढ़ की एक बोली है, जो बस्तर में प्रचलित है।

कुडुख या कुरुख उत्तर छत्तीसगढ़ में बोली जाती है, हल्बी दक्षिण छत्तीसगढ़ में, फिल्म मध्य छत्तीसगढ़ में शूट होती है, कहानी पूरे भारत की है।

तो अपूर्व अपने थीम सांग में बताते है कि यह जो पूरे भारत की कहानी है, उसका यह संस्करण उस छत्तीसगढ़ का है जो अपने मन में अपने मेहमानों के लिए हमेशा अगाध प्रेम लिए हुए है। आमचो बस्तर कितरो सुंदर…हमारे पास बस्तर जैसा सुंदर हृदय है…आप कहां से आए हो पहुना, आपको देखकर प्यार आता है, बहुत अपने-अपने से लगते हो…

यदि इजाजत मिले तो मैं इसे chaman bahar के थीम सांग के बजाय छत्तीसगढ़ की संस्कृति का थीम सांग कह डालूं।

इस थीम सांग में कुड़ुख और हल्बी के बीच में एक धुन बजती है, वह छत्तीसगढ़ी लोकधुन है, इस गाने में उसके पास कोई शब्द नहीं है। वह रिंकू ननोरिया जैसी है।

अंग्रेजी के आतंक के बीच जब हिंदी ही अपने अस्तित्व को जूझ रही हो, तब राष्ट्रीय क्षितिज पर लुप्त होती दुर्लभ बोलियों की गूंज सुनना सुखद और रोमांचक है। अपूर्व ने इन लोकबोलियों की ताकत को अपने फिल्म के संगीत की ताकत बनाया है।

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