नई दिल्ली. ऐसी लड़की… जिसका मन भी और बच्चों की तरह बाहर जाने, खेलने कूदने को करता है लेकिन वो ऐसा कर नहीं सकती. क्योंकि वो बाकी बच्चों से अलग है. वो खुद से कहीं आ-जा नहीं सकती. वो हर समय व्हील चेयर पर बैठे रहने को मजबूर है. मगर फिर भी उसकी मन की उड़ान ऐसी है कि आसमान छू लेना चाहती है. ये कहानी है अनुष्का पांडा की. अनुष्का, जो एक ऐसी बीमारी से लड़ रही हैं जिसकी वजह से न वह व्हील चेयर से उठ सकती हैं और न ही खेल कूद सकती है. ऐसी विषम परिस्थितियों के बावजूद मुश्किलों से लड़ते हुए अनुष्का पांडा (Anushka Panda) ने साल 2018 में सीबीएसई बोर्ड की दसवीं परीक्षा (CBSE Board 10th Result 2020) में टॉपर्स लिस्ट में अपने लिए जगह बनाई और डिसएबल्ड कैटेगरी में पहला स्थान पाया. अनुष्का को 500 में से 489 नंबर यानी 97.8 फीसदी अंक प्राप्त हुए.
स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी, पीएम मोदी ने दी थी बधाई
अनुष्का पांडा को उस साल अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी थी और सराहना भी की थी. पीएम ने कहा कि दिव्यांगता भी अनुष्का को टॉपर बनने से नहीं रोक पाई. उन्होंने ये भी कहा कि देश में बहुत सारे ऐस ऐसे बच्चे हैं जो गरीब हैं या दिव्यांग हैं लेकिन ये मुश्किलें सफल होने से नहीं रोक पाईं. अनुष्का स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी से पीड़ित थीं जो कि जेनेटिक बीमारी है इसकी वजह से चलने में दिक्कत होती है.
दिए गए समय से कम समय में पूरी की परीक्षा
ये सफलता और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि अनुष्का ने दिव्यांग छात्रों को मिलने वाले एक्स्ट्रा आधे घंटे का भी प्रयोग नहीं किया था. दरअसल, दिव्यांग छात्रों को परीक्षा में उनकी शारीरिक स्थिति के कारण आधे घंटे ज्यादा दिए जाने की व्यवस्था है ताकि सभी के साथ न्याय हो सके, लेकिन अनुष्का ने इस एक्स्ट्रा आधे घंटे का भी प्रयोग नहीं किया. इसके बावजूद अनुष्का को इंग्लिश में 95, इतिहास में 99, गणित में 99, साइंस में 98 और सोशल साइंस में 99 अंक मिले.
चेस खेलना है पसंद
अनुष्का को शतरंज यानी चेस खेलना काफी पसंद है और वह जब भी खाली समय मिलता है तो चेस खेलती हैं. हालांकि, वह इंजीनियर बनना चाहती हैं. अनुष्का ने अपनी सफलता पर काफी खुश थीं और अपने स्कूल को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा कि स्कूल ने काफी अच्छा इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराया जिसकी परीक्षा देने में सुविधा हुई.
