रायगढ़। धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में पारंपरिक त्योहारों की शुरुआत हरेली से होती है. किसान के इस त्योहार में घर में मौजूद कृषि उपकरणों की पूजा की जाती है. सदियों पुरानी यह परंपरा इस बार अलग ही अंदाज में मनाई जाएगी, क्योंकि इसी दिन से प्रदेश सरकार हरेली त्योहार से गोधन न्याय योजना का क्रियान्वयन करने जा रही है.
किसानों के जीवन में गाय–बैल का विशेष महत्व है. यही वजह है कि हरेली जैसे त्योहारों का कृषि प्रधान छत्तीसगढ़ में विशेष महत्व है. समय के साथ कृषि के मशीनीकरण से इनका महत्व कम हो गया है, जिसे पुन: स्थापित करने के लिए सरकार किसानों–पशुपालकों से डेढ़ रुपए किलो के हिसाब से गोबर खरीदने जा रही है. गोबर का कंपोस्ट खाद बनाकर खेत की उर्वरा शक्ति को बढ़ाई जाएगी. वहीं गौठान को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न आर्थिक गतिविधियां संचालित की जाएगी. इस योजना के बारे में जब लल्लूराम डॉट कॉम ने समाज के विभिन्न संगठन से जुड़े लोगों से चर्चा की. सभी ने योजना को ऐतिहासिक बताते हुए इसे छत्तीसगढ़ के किसानों के जीवन को बदलने वाला करार दिया.