विधायिका देवती कर्मा जी के बयान को उल जलूल कहना मतलब किसानों के दर्द को उल जलूल कहने जैसा : राहुल महाजन

● विधायक कर्मा जी खुद एक किसान है और उनसे बेहतर किसानों का दर्द कोई नही समझ सकता ।

● यह अध्यादेश किसान विरोधी नीति की एक कड़ी है ।

● भाजपा सिर्फ पूंजीपतियों की सरकार है इसलिये एनएमडीसी नगरनार और किरंदुल के खदानों को अडानी को बेचा जा रहा है ।

दन्तेवाड़ा से कांग्रेसी विधायक देवती कर्मा जी के किसान विरोधी अध्यादेश के सम्बंध में केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हांथ लेकर बयान देने पर भाजपा जिलाध्यक्ष अट्टामी जी द्वारा जो ब्यान देकर विधायका जी के वक्तव्य को उल जलूल बयान कह रहे है, तो भाजपा जिलाध्यक्ष को पता होना चाहिए दन्तेवाड़ा की विधायिका पहले एक किसान है और जो किसानों का दर्द भलीभांति समझती है और अगर एक किसान अपना दर्द बयां कर रहा है तो उसमें उल जलूल क्या है, जिससे साफ पता चलता है कि अट्टामी जी और उनकी भाजपा मात्र किसान हितैषी होने का ढोंग करती है और उन्हें किसानों के दर्द से कोई लेना देना नही है । भाजपा किसानविरोधी का सबूत तो यही है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश का सबसे बड़ा घोटाला “नान घोटाला” है । भाजपाइयो ने पहले तो बेरोजगारों का हक़ छीना और नगरनार जैसी बहुमाहत्वकांशी परियोजना को पूंजीपतियों को बेचने का प्रयास किया। भाजपा जिलाध्यक्ष अट्टामी जी को चाहिए कि पहले केंद्र सरकार द्वारा पारित अध्यादेश की सही से जनकारी लेंवे और मात्र इतना बता दे कि अध्यादेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य क्यों नही दर्शाया गया है ?? और क्यों आज देश का हर किसान इस अध्यादेश के विरोध में अपने स्वर ऊंचे कर इस कोरोना महामारी के बावजूद भी जान जोखिम में डालकर सड़को पर आंदोलन करने पर मजबूर हुए है ??

दन्तेवाड़ा विधायिका देवती कर्मा जी के खिलाफ दिए गए भाजपा जिलाध्यक्ष के बयान का कटाक्ष करते हुए कांग्रेसी युवा नेता राहुल महाजन ने कहा कि ओछी मानसिकता और ऊल जलूल ब्यान कि बात भाजपाई न ही करे तो बेहतर है वरना सिर्फ यही जुमले ही है जिससे भाजपा देश की जनता को बेवकूफ बनाये जा रही है । किसान हितैषी का ढोंग कर किसानों को पूंजीपतियों के हांथो का कतपुलती बनाने वाला अध्यादेश है । पहले से ही देश के बड़े उद्योगों को तो पूंजीपतियों को बेच ही रही है अब किसानों के पीछे पड़ी हुई है । भाजपाई अगर देश हित का सोचते तो बस्तरवासी आज एनएमडीसी नगरनार प्लांट को पूंजीपतियों के हांथो में जाने से बचाने के लिए इतनी लड़ाइयां न लड़ रहे होते और न दन्तेवाड़ा के खदानों को अडानी को दी गई होती ।

धान चोरी मामले में विधायिका की छवि धुमिल करने के इरादे से मोदी जी की तरह जुमलेबाजी करने से पहले अट्टामी जी को अपने चश्मे साफ कर देख लेना चाहिए था कि कांग्रेस अपनी नीतियों और नियमो की पार्टी है और जिसने अपने ही पार्षद पर तुरंत कार्यवाही करते हुए उसे पार्टी से निष्काषित कर जनता के समक्ष अपना मजबूत पक्ष रखा है कि गलत करने वाला चाहे पार्टी का ही क्यों न हो उसे बक्शा नही जाएगा और सभी पर कार्यवाही की जाएगी । आज भाजपाइयो को दन्तेवाड़ा विधायिका से सिख लेनी चाहिए और तुरंत ही नान घोटाले के दोषियों के नामों को जनता के सामने उजागर करना चाहिए । कांग्रेसियो को किसान विरोधी बताने वाले शायद यह भूल गए है कि राज्य का सबसे बड़ा नान घोटाला भाजपा कुशासनकाल की ही देन है और बल्कि कांग्रेस ने किसानों का दर्द समझा और सत्ता में आते ही सबसे पहले किसानों का कर्ज माफ किया है । भाजपाइयों को आज चाहिए कि वें कांग्रेसियो से रीति नीति सीखे और जनहित में कार्य करे ।।

राहुल महाजन
दन्तेवाड़ा

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