छग में किसानों के लिए नया कानून बनाएगी सरकार….मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कृषि विधेयक कानून को गलत ठहराते हुए कहा कि केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य को भी खत्म करना चाहती है। छत्तीसगढ़ के किसान इसी मूल्य पर उपज का सौदा करते हैं। छत्तीसगढ़ में हम किसानों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे, इसके लिए कानून बनाएंगे।

रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कृषि विधेयक कानून को गलत ठहराते हुए कहा कि केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य को भी खत्म करना चाहती है। छत्तीसगढ़ के किसान इसी मूल्य पर उपज का सौदा करते हैं। छत्तीसगढ़ में हम किसानों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे, इसके लिए कानून बनाएंगे। एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन बेचने के बाद इनकी नजर किसानों की जमीन पर है। केंद्रीय कृषि विधेयक केंद्र ने पारित किया, वह नियमों के विपरीत है। राजीव भवन में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ रविवार को प्रेसवार्ता में मंत्री रविंद्र चौबे, मोहम्मद अकबर, डा. शिव डहरिया भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि पूरा देश महामारी से जूझ रहा है, तब इन कानूनों को गुपचुप तरीके से लाया गया। पूरे मीडिया का ध्यान एक्टर सुशांत सिंह की मौत मामले में था, तब कानून बनाया गया। केंद्र सरकार एफसीआई को खत्म कर देना चाहती है। इससे छत्तीसगढ़ जैसे अनाज उत्पादक राज्यों को नुकसान होगा।

संविधान में कृषि राज्य सरकार का विषय है, इस पर कानून बनाने का अधिकार राज्य को है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पारित बिल अवैधानिक है, ट्रेड शब्द जोड़कर बिल लाया गया, जो संघीय ढांचे के विपरीत है, ऐसी स्थिति में भविष्य में केंद्र किसानों की उपज पर टैक्स भी लगा सकती है। श्रम कानून राज्यों के बिना विश्वास के लाया गया, शांता कमेटी की रिपोर्ट अनुसार यह कानून लागू किया गया। कृषि सुधार कानून, श्रम कानून में परिवर्तन को लेकर उन्होंने कहा कि जो बिल लाए गए, हम उसका विरोध करते हैं। केंद्र सरकार किसानों को धोखा दे रही है। इन्हीं किसान और गरीब विरोधी नीतियों की वजह से हम कृषि विधेयक और श्रम कानूनों को वापस लेने की मांग करते हैं। उन्होंने कहा कि एआईसीसी के नेतृत्व में देश के राष्ट्रपति से अनुरोध करेंगे कि इस कानून पर हस्ताक्षर न करें।

उन्होंने कहा कि कांट्रैक्ट फॉर्मिंग में कई कानूनी दांव-पेंच हैं, जिसमें अनपढ़ और कम पढ़े-लिखे लोग फंसकर रह जाएंगे, व्यापारी अब सस्ते दाम पर उपज खरीदकर मनमाने दाम पर बेचेंगे। यह पीडीएस सिस्टम को खत्म करने की साजिश है। किसानों को पहले भी अपनी उपज बेचने के लिए छूट थी। छत्तीसगढ़ में 90 प्रतिशत किसानों को एमएसपी के अलावा अतिरिक्त भी लाभ दिया गया है। विधेयक में इस बात का प्रावधान नहीं है कि एमएसपी से कम दर पर फसल बेचने का अनुबंध नहीं किया जाएगा। इसके अतिरिक्त बाढ़, सूखे, अतिवृष्टि अथवा कीट प्रकोप की दशा में किसानों की क्षति की भरपाई का कोई प्रावधान नहीं है।

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