इंडिया गेट पर भयानक आगजनी: कृषि बिल पर विरोध भड़का, ट्रैक्टर में लगा दी आग

नई दिल्ली: मानसून सत्र में भारी हंगामे के दौरान कृषि विधेयक को संसद के दोनों सदनों से पास कराने के बाद बीते दिन राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने भी मोदी सरकार के कृषि संशोधित अध्यादेश 2020 को मंजूरी दे दी। विपक्ष ने इसे लेकर राष्ट्रपति से अपील की थी, वहीं देश भर में किसान इस बिल का विरोध कर रहे हैं, इन सब के बाद बिल को मंजूरी दिए जाने से नाराज कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आज दिल्ली के राजपथ में एक ट्रैक्टर में आग लगा दी।

कृषि बिल का विरोध

मोदी सरकार के कृषि कानून लाये जाने पर किसानों और विपक्षी दलों का विरोध थम नहीं रहा। रेल रोको अभियान और भारत बंद के बाद आज दिल्ली में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर उतर आये और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के राजपथ में कृषि बिल का विरोध करते हुए गुस्साए कार्यकर्ताओं ने एक ट्रैक्टर में आग लगा दी।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राजपथ में ट्रैक्टर में लगाई आग

दरअसल, आज सुबह कांग्रेस कार्यकर्ता एक ट्रैक्टर लेकर राजपथ पहुंचे और इंडिया गेट के पास उन्होंने कृषि विधेयक का विरोध करते हुए ट्रैक्टर को आग के हवाले कर दिया। हालाँकि मौके पर तत्काल ट्रैफिक पुलिस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंची और आग पर काबू पाया। वहीं पुलिस को देख कांग्रेस कार्यकर्ता मौके से भाग निकले। पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू की है। सीसीटीवी के जरिये उन लोगों की पहचान की जा रही है, जिन्होंने ट्रैक्टर में बीच सड़क आग लगा दी।

राष्ट्रपति ने दी कृषि संबंधित बिल को मंजूरी

गौरतलब है कि मॉनसून सत्र में लाए गए कृषि संबंधित बिल कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक 2020, कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक-2020 को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों से मंजूरी मिल चुकी है। अब इनको राष्ट्रपति ने भी हरी झंडी दिखा दी है।

किसानों और राजनीतिक दलों ने किया प्रदर्शन

बता दें कि बीते रविवार जब मोदी सरकार ने कृषि सम्बन्धी इन विधेयकों को राज्यसभा से पास कराया तो इस पर संसद में जमकर हंगामा हुआ था। साथ ही देशभर में किसान सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए थे। राजनीतिक दलों समेत किसान संगठनों द्वारा 25 सितंबर शुक्रवार को भारत बंद बुलाया गया था। इस दौरान उत्तर भारत, पंजाब, हरियाणा, और पश्चिम उत्तर प्रदेश में जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ।

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