सुशांत केसः डॉ. सुधीर गुप्ता की ‘यू-टर्न-लीक’ मामले में बढ़ी मुश्किलें, संसदीय पैनल भेज सकता है समन

सुशांत सिंह राजपूत केस में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के फॉरेंसिक विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता के यू-टर्न को एक्सपोज करता है। इस खुलासे के बाद, सूत्रों ने बताया है कि डॉ. सुधीर गुप्ता को अपने बदलते बयानों पर स्पष्टीकरण देने के लिए स्वास्थ्य मामलों की संसदीय पैनल द्वारा बुलाया जा सकता है।

बता दें कि इससे पहले, बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने डॉ. सुधीर गुप्ता को एक्सपोज करने के बाद कहा था कि उन्होंने संसद में इस मामले को उठाया है।

उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा- “इशकरण भंडारी कुछ दिन से डॉ. गुप्ता के बयान बदलने पर काम कर रहे थे। वो जल्द ही मीडिया से बात करेंगे। अब CBI को वो करना चाहिए जो अनिवार्य हैः हत्या की धारा 302 के तहत अतिरिक्त एफ़आईआर दर्ज करनी चाहिए। कल मैंने संसद में स्वास्थ्य मामलों की स्थायी समिति के सदस्य के रूप में जांच करने का अनुरोध किया है।”

डॉ. सुधीर गुप्ता का यू-टर्न हुआ एक्सपोज

22 अगस्त को डॉ. गुप्ता से एक  CHANAL ने एक्सक्लूसिव बात की थी जिसमें उन्होंने ‘मुंबई के कूपर अस्पताल की ‘ऑटोप्सी रिपोर्ट में बहुत सी खामियों’ को लेकर सवाल उठाए थे। हालांकि, अब सुशांत मामले में उनकी ‘कथित सुसाइड थ्योरी’ सामने आने से लोगों ने उनके ऊपर ही सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

सुधीर उस फॉरेंसिक डॉक्टरों की छह सदस्यीय टीम के हेड हैं जो CBI को अपनी समग्र चिकित्सा-कानूनी राय देने के लिए गठित हुई है। पिछले दो दिनों में कई मीडिया रिपोर्ट्स में डॉ. सुधीर गुप्ता के हवाले से कहा गया है कि ‘अभिनेता ने सुसाइड किया था और हत्या के एंगल को खारिज कर दिया गया है।’ हालांकि, इसे लेकर अभी तक AIIMS या CBI की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

डॉक्टर सुधीर गुप्ता ने कहा था कि ‘क्राइम सीन को सील नहीं किया गया, सबूतों से छेड़छाड़ हुई थी।’ उन्होंने 22 अगस्त के इंटरव्यू में आगे सवाल किया कि ऑटोप्सी में जल्दी क्यों हुई, वीडियोग्राफी हुई है कि नहीं हुई है? यहां तक कि क्राइम सीन के सबूत नष्ट हो गए।’ उन्होंने आगे कहा कि ‘AIIMS बोर्ड आश्चर्यचकित है कि क्राइम सीन इतना सुरक्षित नहीं था कि वो आगे कि फॉरेंसिक सबूत के लिए उपयुक्त हो सके।’

एक चैनल के पास डॉ. सुधीर गुप्ता के साथ 11 अगस्त की व्हाट्सएप चैट भी हैं जिसमें उन्होंने फोरेंसिक पर सवाल उठाए थे। उन्होंने सवाल किए थे- “कूपर के पांच डॉक्टरों के पैनल ने ऑटोप्सी की … केवल एक जूनियर स्तर के फोरेंसिक डॉक्टर हैं … बाकी 4 सिर्फ चिकित्सा अधिकारी हैं। पैनल को मानदंडों के अनुसार फोरेंसिक विशेषज्ञों का होना चाहिए। मेडिकल बोर्ड का गठन किसने किया?”

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