यहां मासिक धर्म आने पर ‘आइसोलेट’ होती हैं गांव की महिलाएं……..

कोरोनाकाल में आइसोलेशन का सिस्टम इस दौर में बना है। राजनांदगांव जिले में एक गांव ऐसा है जहां कोरोना पॉजिटिव होने पर नहीं बल्कि मासिक धर्म आने पर महिलाओं को गांव में ही बनी एक कुटिया में समय बिताना पड़ता है। जिला मुख्यालय से करीब 125 किमी दूर ग्राम सीतागांव में एक विशेष समाज की यह प्रथा है और बरसों से चली आ रही है। महिलाएं मासिक धर्म आने पर घर से दूर रहती हैं। अछूत मानते हुए उन्हें घर-परिवार से दूर रखा जाता है। सीतागांव पंचायत के अंतर्गत ही यह एक पूरा मोहल्ला आता है। यहां करीब 60 परिवार हैं। करीब 300 लोग निवास करते हैं। एक सप्ताह बाद महिलाएं वापस घर जाती हैं। यहां के पटेल (मुखिया) दुर्गूराम पटेल बताते हैं कि यहां की कुटिया सालों पुरानी है। पहले यह लकड़ी की बनी थी, जिसे 50 साल पहले मिट्टी का बनाया गया। तब वे भी छोटे थे। गांव में जागरुकता अभियान चलाने की बात प्रशासन ने दो साल पहले कही थी। मौजूदा सरपंच चंदा मंडावी बीएससी पढ़ी हैं। वे कहती हैं कि हालात में कुछ सुधार किए थे। आगे प्रयास करेंगे।

यहां न लाइट और न टॉयलेट की सुविधा
कुटिया में बिजली नहीं है। आसपास गंदगी पसरी हुई है। पास में ही दो टॉयलेट बनाए गए थे वो भी चोक हो चुके हैं। दरवाजे भी नहीं हैं। गांव के पटेल दुर्गूराम ने बताया कि घर से खाना लाकर यहां छोड़ देते हैं। हर सप्ताह दो से तीन महिलाएं यहां रहती हैं।

पूर्व कलेक्टर ने इस प्रथा को छोड़ने का किया था आग्रह
दो साल पहले 2018 में कलेक्टर रहे भीम सिंह ने गांव जाकर समाज में प्रचलित प्रथा को छोड़ देने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सुविधा समाज के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है ऐसी कोई भी प्रथा जिससे यह प्राथमिकताएं खतरे में आ जाएं, उसे छोड़ देना चाहिए। सिंह ने यहां सैनेटरी पैड निशुल्क उपलब्ध कराने की बात भी कही थी। कुछ दिनों तक महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने मेंस्ट्रल हाइजीन का संदेश देने की बात कही। सीतागांव में सेनेटरी पैड भी बांटे थे।

विभाग के अफसरों की टीम को भेजेंगे गांव
“मैंने सीतागांव विजिट के समय भी महिला सरपंच को इस संबंध में बोला था। फिर से स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभाग के अफसरों की टीम को गांव में भेजा जाएगा। जागरुकता के लिए प्रयास किया जाएगा।”

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