रायपुर. छत्तीसगढ़ में संभवतया यह पहला साल होगा जब वनाधिकार पट्टाधारी किसान अपनी जमीन पर उगाए गए धान की उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेच सकेंगे। प्रदेश सरकार ने प्रदेश के वनाधिकार पट्टाधारी किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में वन अधिकार पट्टाधारी किसानों से भी समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी का निर्णय लिया है। बताया गया है कि प्रदेश में असर्वेक्षित ग्राम, वनग्राम की संख्या 813 है। अब तक वन ग्रामों के साढ़े चार हजार से अधिक किसानों ने एमएसपी पर धान बेचने के लिए अपना पंजीयन करवाया है। पंजीयन के लिए सॉफ्टवेयर में किया प्रावधान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर खाद्य विभाग द्वारा वन अधिकार पट्टा वाले किसानों के पंजीयन के लिए साफ्टवेयर में आवश्यक प्रावधान किया जा रहा है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव द्वारा ऐसे वन अधिकार पट्टाधारी किसानों का पंजीयन करने के निर्देश सभी जिला कलेक्टरों को जारी किया गया है, जिन्होंने अपने पट्टे की भूमि पर धान की फसल बोई है। बताया गया है कि प्रदेश में असर्वेक्षित ग्राम वन ग्रामों की कुल संख्या 813 है। खाद्य विभाग द्वारा प्रविष्ट असर्वेक्षित ग्राम वन ग्राम की संख्या 300 है।
सबसे अिधक वनग्राम धमतरी जिले के सूत्रों के अनुसार प्रदेश में खाद्य विभाग के असर्वेक्षित ग्राम वन ग्राम जिनकी संख्या 300 है। वहां कुल किसानों की संख्या 20 हजार 403 है। इन किसानों का धान का कुल रकबा 22 हजार 145 हेक्टेयर है। इनमें से अब तक 4 हजार 547 किसानों ने अपना धान बेचने के लिए पंजीयन कराया है। खाद विभाग द्वारा प्रविष्ट असर्वेक्षित ग्राम वन ग्राम जिनकी संख्या 300 है। इनमें सबसे अधिक 61 गांव धमतरी जिले के हैं। इसके बाद बलौदाबाजार जिले में 56 गांव, मुंगेली में 43 तथा कोंडागांव में 32 गांव हैं। कलेक्टरों को मिला है ये निर्देश जिला कलेक्टरों को जारी निर्देश में कहा गया है कि खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदने के लिए किसान पंजीयन का कार्य प्रचलित है। किसान पंजीयन के संबंध में अब ऐसे किसान जिनके पास वन अधिकार पट्टा है और उन्होंने इस भूमि पर धान की फसल बोई है, उनका भी धान खरीदी के लिए किसान पंजीयन किया जाए। जिले में ऐसे कुल किसानों की संख्या और धान का कुल रकबा की जानकारी से एनआईसी और विभाग को ई-मेल और पत्र के माध्यम से अवगत कराया जाए। निर्देश में बताया गया है कि साफ्टवेयर में वन अधिकार पट्टा वाले किसानों के पंजीयन के लिए आवश्यक प्रावधान किया जा रहा है। इस साल एमएसपी पर धान बेचने के लिए पंजीयन की अवधि 10 नवंबर तक रखी गई है।
एक दिसंबर से धान खरीदी पर भाजपा की आपत्ति मंत्रिमंडल उपसमिति द्वारा एक दिसंबर से धान खरीदी के निर्णय पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदेव साय ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है, किसानों को छलने, ठगने और झूठ बोलने वाली प्रदेश सरकार कम धान खरीदी की नीयत से षडयंत्र कर रही है। प्रदेश सरकार एक तरफ गिरदावरी रिपोर्ट के नाम पर रकबा कम करने का षडयंत्र रचती है तो दूसरी तरफ धान खरीदी एक माह बाद करके किसानों के सामने परेशानी खड़ी करती है। उन्होंने कहा, प्रदेशभर में धान कटाई प्रारंभ हो चुकी है। प्रदेश सरकार द्वारा एक दिसंबर से धान खरीदी के निर्णय के बाद किसानों के माथे पर चिंता साफ देखी जा सकती है कि वे अपने धान को सुरक्षित एक महीने तक कैसे रख पाएंगे। श्री साय ने कहा, हम प्रारंभ से ही एक नवंबर से धान खरीदी करने व प्रति एकड़ 20 क्विंटल धान खरीदी की मांग करते रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा एक महीने विलंब से धान खरीदी का निर्णय किसान विरोधी चेहरे को उजागर करता है। उन्होंने कहा, मंत्रिमंडल की उपसमिति द्वारा लिए गए निर्णय पर प्रदेश सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए। श्री साय ने कहा, बारदाने को लेकर सरकार बहानेबाजी बंद करे। उन्होंने कहा, कांग्रेस शासित पंजाब में बारदाने की कोई शिकायत नहीं है। वहां रिकार्ड खरीदी हो रही है। छत्तीसगढ़ में भी धान खरीदी के लिए केंद्र सरकार की ओर से सभी सहूलियतें और सहयोग दिया जा रहा है, इसके बावजूद राज्य के कृषि मंत्री द्वारा केंद्र पर मिथ्या आरोप लगाया जाना गलत है।
