Bihar Election 2020: सात नवंबर को बिहार में आखिरी चरण के लिए वोट डाले जा रहे हैं. सुबह से ही मतदान केंद्रों पर कतार में लगे लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. अंतिम चरण के लिए जद(यू), भाजपा, कांग्रेस, राजद ने एड़ी-चोटी का जोर लगाया, तो वहीं छोटे गठबंधन के दिग्गज नेताओं ने भी इस चरण के लिए काफी मेहनत की है. कहते हैं कि अंत भला तो सब भला…आज चुनाव खत्म होते ही बिहार में किसकी बनेगी सरकार, इसे लेकर भविष्यवाणी शुरू हो जाएगी. 10 नवंबर को जनता किसके सिर पर सेहरा बांधती है, इसका इंतजार रहेगा.
नीतीश कुमार की जदयू बिहार की राजनीति में भाजपा के बड़े भाई की भूमिका निभाती आई है और इस बार भी भाजपा ने उन्हें सीएम पद का उम्मीदवार बनाया है. इस बार भाजपा 121 तो जद(यू) ने एनडीए में बड़े भाई का रुतबा कायम रखने के लिए 122 सीटों पर चुनाव लड़ा है. लेकिन, यदि इस बार भाजपा से जद(यू) की सीटें कम आई और राजद से भी कदाचित पार्टी पिछड़ गई तो इसका असर नीतीश कुमार के राज्य में राजनीतिक दबदबे पर पड़ना तय है
इस बार भाजपा-जदयू के बीच तालमेल की कमी साफ दिखी है. खासकर, नीतीश कुमार के संन्यास लेने की बात का भी चुनाव पर असर दिख सकता है. अगर नीतीश की जदयू अपनी छवि बरकार नहीं रख पाई तो भाजपा का अगला कदम क्या होगा, इस पर भी नजर रहेगी.
चिराग फैक्टर का भी होगा असर
एनडीए में लोजपा की नीतीश से लेकर चल रही नाराजगी और चिराग पासवान के तीखे बयान भी एनडीए के गठबंधन के लिए सही नहीं रहे हैं. हालांकि लोजपा का बिहार में वैसा बड़ा जनाधार तो नहीं है, लेकिन चिराग पासवान की चुनावी सभाओं में उमड़ी भीड़ को देखकर एनडीए के लिए थोड़ी मुश्किल तो जरूर दिख रही है. चिराग का भाजपा प्रेम और मुख्यमंत्री नीतीश के खिलाफ सीधा हमला जदयू के लिए भाजपा के साथ का चुनावी गणित बिगाड़ सकता है. जिसका असर चुनाव रिजल्ट पर दिख सकता है.
तेजस्वी की मेहनत महागठबंधन को कितना मजबूत करेगी
इस बार के चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल की बात करें तो बिना लालू के इस बार बिहार की कमान उनके छोटे पुत्र तेजस्वी यादव के हाथों में है, वो महागठबंधन के सीएम फेस हैं. इस वजह से तेजस्वी ने इस बार चुनाव में काफी मेहनत की है. उन्होंने एक दिन में 15-17 तक जनसभाएं की हैं. उनके कई वीडियो वायरल हुए हैं, जिसमें तेजस्वी यादव हेलीकॉप्टर से उतरकर संबोधित करने के लिए भागते और संबोधन के बाद लोगों से बचकर भागते हुए हेलीकॉप्टर तक पहुंचते कई बार देखे गए हैं.
इस चुनाव में तेजस्वी ने कांग्रेस तथा वाम दल के शीर्ष नेताओं से बराबर तालमेल बनाए रखा है. लोकसभा चुनाव से सबक सीखते हुए तेजस्वी यादव ने इस बार गठबंधन के अन्य दलों को भी तवज्जो दी है और महागठबंन ने इस बार मजबूती दिखाई है.लेकिन राजद के जंगलराज की छवि महागठबंधन की तस्वीर को इस बार कैसा दिखाती है ये तो 10 को बिहार की जनता के वोट तय करेंगे.
