बिहार के सारण जिले के गरखा की रहने वाली 18 साल की युवती एक महीने से भयंकर पेट दर्द से परेशान थी. दवा देने पर भी जब उसे कोई राहत नहीं मिली, तो उसके पिता उसे पटना के आईजीआईएमएस अस्पताल लेकर आए. वहां गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के ओपीडी में उसे दिखाया और जांच कराई गई. जांच से पचा चला कि युवती के पेट और इंटेस्टाइन में बाल का गुच्छा जमा है. गुच्छे को निकालने के लिए उसके पेट का ऑपरेशन किया गया. पता चला कि युवती को लंबे समय से बाल और बोरे का सूत खाने की आदत है
शुक्रवार को डॉ. मनीष मंडल के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने ऑपरेशन करके जब बाल का गुच्छा निकाला गया तो चिकित्सक भी हतप्रभ रह गए. डॉ. मंडल ने बताया कि एक मिलियन में एक मरीज में यह बीमारी मिलती है. इस बीमारी को रिपुंजल सिंड्रोम के नाम से जाना जाता है. चिकित्सकीय भाषा में इसे ट्राइकोबिजोर (पेट में बाल का गुच्छा) के नाम से जाना जाता है
डॉ. आशीष कुमार झा के मुताबिक इसके पहले भी एक लड़की में यह बीमारी मिली थी. यह दुर्लभ बीमारी होती है. जाने-अनजाने में लाेग अपने सिर का बाल खाते रहते हैं. इससे धीरे-धीरे बाल पेट में जमा होने लगता है और गुच्छा बनने लगता है.
