RCEP: दुनिया की करीब एक तिहाई आबादी और कुल 26 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था वाले 15 एशिया पैसिफिक देशों ने 15 नवंबर को एक बड़ा व्यापार समझौता यानी आरसीईपी (RCEP) किया है. लेकिन इस क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (Regional Macroeconomic Comprehensive Partnership) से भारत ने खुद को अलग रखा है. इस तरह से भारत ने आत्मनिर्भर बनने और चीन को पटखनी देने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ा दिया है. इससे भारतीय कारोबारियों को फायदा होगा.
इस(Regional Macroeconomic Comprehensive Partnership) की इसबार मेजबानी की है वियतनाम ने, जिसके प्रधानमंत्री गुयेन जुआन फुक ने कहा कि यह दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता है. इन 15 देशों में आशियान देशों के 10 मेंबर (ब्रुनेई दारुसलम, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लोआस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाइलैंड और वियतनाम), चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं. भारत इस बार डील से बाहर है, जबकि आरसीईपी की नींव डालने वाले 16 देशों में भारत भी शामिल था.
दरअसल पिछले साल नवंबर में जब भारत ने RCEP से हटने का फैसला किया था, तब चीन के खिलाफ वैसा माहौल नहीं था, जो आज है. हालांकि उस समय भारत ने आंतरिक कारोबारियों, रातनीतिक दलों और अन्य के दबाव में इससे हटने का निर्णय लिया था, पर उसके बाद इसी साल जून में डोकलाम में जब 20 भारतीय सैनिक चीन के साथ लड़ाई में शहीद हो गए तो मामला पूरी तरह से बिगड़ गया. भारत ने चीन के तमाम ऐप पर बैन लगा दिया और वहां की कंपनियों को यहां सरकारी ठेका भी रद्द कर दिया।इसके अलावा कई सारे प्रतिबंध भी भारत ने लगाए.
भारत को होगा फायदा, चीन को होगा सबसे ज्यादा घाटा
RCEP से भारत के हटने का फायदा बहुत सारा है. इसमें चीन को सबसे ज्यादा घाटा होगा. अगर भारत इसमें शामिल हो जाता तो चीन भारत के बाजार में बिना किसी रोक टोक के कारोबार करता. वह सस्ती कीमतों पर सामान बेचता. साथ ही इससे भारत का व्यापार घाटा भी बढ़ सकता है. भारत के छोटे कारोबारी खत्म हो जाते थे, लेकिन भारत ने एक बहुत बड़ा फैसला जो एक साल पहले किया था, वह अब सही दिख रहा है.
क्या है आरसीईपी (RCEP)
दरअसल दुनिया में प्रसिद्ध अन्य मुक्त व्यापार समझौतों की तुलना में आरसीईपी एक नये प्रकार का मुक्त व्यापार समझौता है. आंकड़ों के अनुसार 15 सदस्य देशों की कुल जनसंख्या करीब 2 अरब 30 करोड़ है, जो दुनिया की 30 प्रतिशत आबादी है. वहीं 15 सदस्य देशों का कुल जीडीपी 250 खरब डॉलर से अधिक है. RCEP से जुड़ा क्षेत्र दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार क्षेत्र बनेगा. इसके साथ RCEP में माल व्यापार, विवाद निपटान, सेवा व्यापार और निवेश आदि मुद्दों के साथ बौद्धिक संपदा अधिकार, डिजिटल व्यापार, फाइनेंस और टेलीकॉम आदि नये विषय भी शामिल हैं.
आर्थिक तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा आरसीईपी
RCEP विभिन्न देशों में आर्थिक बहाली और लंबे समय के समृद्धि व विकास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. व्यापार उदारीकरण की प्रक्रिया तेज होने के चलते क्षेत्रीय आर्थिक और व्यापारिक विकास बढ़ाया जाएगा. RCEP का लाभ सीधे ग्राहकों और उद्यमों तक पहुंचाया जाएगा. जिससे ग्राहकों को बाजार में ज्यादा विकल्प मिलेंगे और उद्यमों की व्यापार लागत काफी हद तक कम होगी.
