आदतों को खुद पर न होने दे हावी….ओसीडी का उपचार सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों में निशुल्क उपलब्ध

रायपुर 18 अगस्त 2020 ।
कोरोना महामारी के दौरान लोगों की बहुत-सी आदतों और व्यवहार में परिवर्तन देखने में आ रहा है ।कुछ परिवर्तन तो स्वाभाविक है लेकिन कुछ मन का डर भी दर्शाते हैं|
ऐसी ही एक मनोदशा से आजकल कई लोग गुज़र रहे हैं जिससे मनोग्रसित बाध्यता विकार यानि ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD) से जाना जाता है। इस विकार से रोगी कुछ अजीब सी आदतें का आदि हो जाता है जो कई बार डर का रूप लेती हैं ।
रायपुर मनोरोग स्पर्श क्लीनिक के चिकित्सा मनोवैज्ञानिक डीएस परिहार कहते है:‘’मनोग्रसित बाध्यता विकार एक चिंता विकार है, जो व्यक्ति के दिमाग में चल रहे विचारों से उत्पन्न होता है। यह ऐसे विचार हैंजिनके बारे में लगातार सोचते रहने से यह आदत बन जातेहै या फिर आपके डर का रूप भी लेते हैं।’’
कोरोना काल में ऐसे व्यक्तियों का आंकड़ा बढ रहा है।जुनूनी बाध्यता विकार के नाम से भी जाने जाए वाले इस विकार में व्यक्ति हमेशा एक तरह के डर से घिरा रहता है। एक ही क्रिया को न चाहते हुए भी बार-बार करता रहता है।डर और खौफ के चलते जैसे दिनभर अकारण हाथ धोते रहना, किसी भी चीज़ को छूने के बाद बार-बार हाथों को सेनेटाइज़ करना,या बार बार मुंह धोते रहना बिना कारण और ऐसी कोई क्रिया करना जिसका कोई औचित्य नहीं है ।विकार से परेशान व्यक्ति को पता नहीं होता वह जो कर रहा है, वह सही है या नहीं।
यह विकार होने पर व्यक्ति की सामान्य जिदंगी पर भी प्रभाव पड़ता है। यहां तक कि व्यक्ति के नियंत्रण में उसकी गतिविधियां नहीं होतीं।
ओसीडी(OCD) पुरुषों से ज्यादा महिलाओं में आम है। गन्दगी से डरते रहना,दिन भर अकारण बार-बार हाथ धोना,सामान सलीके से रखते रहना,दिल दुखानेसे आहत होना,रंगों को अच्छा बुरा मानना,पलके झपकना,करिबियोंको विश्वासघाती समझना,पूर्ण हो गये कार्य पर संदेह करना,या दूसरों से हाथ मिलाते समय डरना इसके कुछ लक्षण है ।तनाव,अवसाद,दुर्घटना होने के कारण,या फिर बचपन में शारीरिक या यौन शोषण होने से यह स्थिति हो सकती है । इसके बाद जैसे-जैसे तनाव बढ़ता है, वैसे वैसे इसके लक्षण भी भयावह होते जाते हैं।
चिकित्सा मनोवैज्ञानिक परिहार का कहना है: इस विकार से निकला जा सकता है लेकिन पहले से बचा नहीं जा सकता है। ऐसी स्थिति में चिकित्सक मरीज को दवा और साइकोथैरेपी देते हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मीरा बघेल ने कहा ज़िला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत ज़िला चिकित्सालय में स्पर्श क्लीनिक की स्थापना की गई है । किसी भी प्रकार की मानसिक समस्या होने पर व्यक्ति यहाँ परामर्श कर सकते है । इसके अलावा पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के सहयोग से मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम में 17 मनोवैज्ञानिकछात्र-छात्राओं द्वारा स्वैच्छिक सेवा प्रदान कर काउंसलिंग की सुविधा दी जा रही ।
कहॉ से मिल रही है सेवा
आरंग में राहत केंद्र भानसोज ,सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फरफ़ौद,रीवा,चंद्रखुरी,कुरुदकुटेला के स्वास्थ्य केंद्रों से सम्पर्क कर मनोवैज्ञानिक परामर्श मानसिक स्वास्थ्य से पीडित लोग ले सकते है ।
अभनपुर में उपरवारा, अभनपुर, गोबरा नवापारा,तोरला, खोरपा, गुढियारी,खिलोरा के स्वास्थ्य केंद्र से मनोवैज्ञानिक परामर्श पीडित लोग ले सकते है ।
धरसींवा में सिलयारी,मांढर और दोंदेकलॉ बिरगॉव के स्वास्थ्य केंद्र से सम्पर्क कर मनोवैज्ञानिक परामर्श पीडित लोग ले सकते है ।
तिल्दा में खरोरा, बंगोली,खैरखुट केस्वास्थ्य केंद्र से मनोवैज्ञानिक परामर्श ले सकते है ।
रायपुर में हिरापुर कबीरनगर और भाटागॉव, डीडी नगर के स्वास्थ्य केंद्र सेसम्पर्क कर मनोवैज्ञानिक परामर्श पीडित लोग ले सकते है ।

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