रक्षा मंत्री ने कहा, “इसका निर्माण बड़ी संख्या में अध्यापकों, शिक्षाविदों, माता-पिता और अन्य नागरिकों द्वारा दिए गए 2 लाख से अधिक सुझावों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। मुझे लगता है कि यह नीति हमारे देश भर के प्रबुद्ध लोगों द्वारा किए गए वैचारिक निवेश का परिणाम है। यह सही मायने में ‘राष्ट्रीय’ नीति है।”
इस दौरान रक्षा मंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में किए गए परिवर्तनों पर विस्तार से बात की और बताया कि नई शिक्षा नीति एक मजबूत, समृद्ध और श्रेष्ठ भारत बनाने में मदद करती है।
उन्होंने कहा, “स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक इस नीति के तहत कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों का समग्र विकास करते हुए एक मजबूत, समृद्ध और श्रेष्ठ भारत का निर्माण करना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का कार्यान्वयन शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी शुरुआत है।”
इसके अलावा, उन्होंने सभी समन्वयकों से कहा कि वो ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ के मूल दर्शन को देश के प्रत्येक कोने में पहुंचाने का काम करें।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020
गौरतलब है कि 29 जुलाई को केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति के रूप में स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारोंं को मंजूरी दी थी। शिक्षा के क्षेत्र में ये सुधार बीते 34 वर्षों के अंतराल के बाद किए गए हैं। इसके तहत पाठ्यक्रम में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा, साक्षरता,संख्या और जेंडर इंक्लूजन फंड पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।
वहीं इसमें अनिवार्य रूप से 10+2 प्रणाली को 5+3+3+4 के प्रारूप में डिवाइड किया गया है। इसका मतलब है कि 5 वर्ष की फाउंडेशन स्टेज- 3 वर्ष प्राथमिक विद्यालय के और 2 वर्ष कक्षा 1 और 2 के, इसके बाद दो वर्ष प्रारंभिक स्तर के लिए यानी कि कक्षा 3 से 5, वहीं माध्यमिक स्तर के लिए कक्षा 6 से 8 और इसके बाद चार वर्ष की सेकेंड्ररी स्टेज कक्षा 9 से 12 तक। वहीं इस शिक्षा नीति के अनुसार स्कूलों में कला और विज्ञान, पाठ्यक्रम और पाठ्येतर और व्यावसायिक और शैक्षणिक शिक्षा के बीच कोई सख्त अलगाव नहीं होगा।
