जल्द ही नवरात्रि शुरु होने वाले हैं और भारत के हर हिस्से में माता की नौ दिनों की पूजा बेहद धूम धाम के साथ की जाती है. नवरात्रि का संस्कृत में मतलब होता है नौ रातें. पूरे भारत में लोग नवरात्रि के इन नौ दिनों के अवसर को बेहद ही उत्साह के साथ मनाते हैं. नवरात्रि में देवी दुर्दा के भक्त उन्हें पूरे रीति-रिवाज के साथ उपवास करते हैं. इन दिनों मां दुर्गा की अलग अलग शक्तियों की पूजा की जाती है. इस दौरान नवदुर्गा के विभिन्न रूपों को प्रसन्न करने के लिए खास तरह से पूजा की जाती है.
इस साल भले ही कोरोना की वजह से माता का स्वागत इतने धूम-धाम ना हो पाए लेकिन लोगों में नवरात्रि को लेकर अलग तरह का उत्साह होता है. इस दौरान लोग घरों की सफाई करते हैं और साथ ही माता को प्रसन्न के लिए हर तरह से उनकी पूजा और उपासना करते हैं. ऐसे में आझ हम आपको बताएंगे की आप नौ देवी के अलग-अलग रुपों की पूजा के दौरान उन्हें कौन सा प्रसाद चढ़ाए जिससे आपको मां दूर्गा का आर्शीवाद मिल सके.

1. शैलपुत्री
नवरात्रि के पहले दिन शैलपुत्री की पूजा होती है और दिन माता की पूजा के दौरान शुद्ध देसी घी चढ़ाया जाता ही. ऐसा माना जाता है की ऐसा करने से माता अपने भक्तों को सभी प्रकार के कष्टों औऱ बीमारी से मुक्ति देती हैं.
2. ब्रह्मचारिणी
दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी को पूजा जाता है, इन्हें मठ देवी के तौर पर जााना जाता है.देवी ब्रह्मचारिणी को सरल भोजन और प्रसाद काफी प्रिय है इसलिए भक्त देवी ब्रह्मचारिणी को चीनी और फलों का भोग लगाते हैं.
3. चंद्रघंटा
चंद्रघंटा माता का तीसरा रुप जिनकी पूजा तीसरे दिन की जाती है, मां शेर पर सवार रहती हैं. माता के मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है जिस वजह से उनका नाम चंद्रघंटा पड़ा है. देवी के इस स्वरूप को दूध, मिठाई और खीर का भोग लगाया जाता है.
4.कुष्मांडा
चौथे दिन कुष्मांडा मां की पूजा की जाती है, इस देवी को प्रसन्न करने के लिए भक्त मालपुए का भोग लगाते हैं.
5. स्कंदमाता
नवरात्रि के पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा होती है, इस दिन को पंचमी भी कहा जाता है. इन्हें केले का भोग लगाया जाता है, ताकि भक्तों को अच्छी सेहत का आशीर्वाद मिल सके.
6. कात्यानी
नवरात्रि के छठे दिन यानि षष्ठी वाले दिन देवी कात्यानी का पूजन होता है, देवी कात्यानी को हाथ में चार हथियार लिए दर्शया गया है. भक्त देवी कात्यानी को प्रसाद के रूप में शहद चढ़ाते हैं.
7. कालरात्रि
सातवें दिन देवी कालरात्रि का पूजन किया जाता है. हिन्दू ग्रंथों के अनुसार, देवी कालरात्रि के चार हाथ हैं जो गधे की सवारी सवारी करती हैं. इन दिन भक्त इन्हें गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाते हैं और इसके अलावा प्रसाद को दक्षिणा के साथ ब्राह्मणों को भी दिया जाता है.
8.महागौरी
दुर्गा अष्टमी या नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी की पूजा का विधान है, बैल इनकी सवारी है. महागौरी को नारियल का भोग लगाया जाता है, इससे सुख-समृद्धि की प्राप्त होती है.
9.सिद्धिदात्री
नवरात्रि के आखिरी दिन देवी सिद्धिदात्री की पूजा होती है. यह कमल में विराजमान हैं, नवरात्रि के नौवें दिन, देवी को तिल का भोग लगाया जाता है. ऐसा माना जाता है कि देवी को तिल का भोग लगाने से परिवार को सुख-शांति मिलती है और दुर्घटनाओं से बचाती हैं.
