क्या आप जानते हैं रावण की मौत के बाद कहाँ गया उसका शव

नवरात्रि का समापन होते ही दशहरा या विजयादशमी मनाया जाता है। दशहरे के दिन रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण का अंत हुआ था और इन्ही के पुतलों का दहन दशहरे के शाम को किया जाता है। अब आज हम आपको बताने जा रहे हैं रावण की विनम्रता के बारे में जिसे जानने के बाद आपको हैरानी होगी।

कहा जाता है राम ने जब रामेश्वरम् में ‍शिवलिंग की स्थापना की थी उस समय विद्वान पंडित की आवश्यकता थी। वहीँ उस समय रावण को निमंत्रण भेजा गया था और रावण ने इसका आमंत्रण स्वीकारा था। उस समय राम-रावण के युद्ध के दौरान रावण ने लंका के ख्यात आयुर्वेदाचार्य सुषेण द्वारा अनुमति मांगे जाने पर घायल लक्ष्मण की चिकित्सा करने की अनुमति भी दे दी थी। जी हाँ, यह सभी बातें आप नहीं जानते होंगे लेकिन यहीं बातें हैं जो रावण की विनम्रता और अच्छाई के किस्से को दर्शाती है। आप सभी को यह भी याद ही होगा कि रावण ने दो साल तक सीता को अपने पास बंधक बनाकर रखा था, लेकिन उसने कभी भूलवश भी सीता को छूआ तक नहीं था। कहा जाता है इसके पीछे उसकी प्रतिज्ञा थी और वह अपनी प्रतिज्ञा को तोडना नहीं चाहता था।

कहाँ गया रावण का शव : कहा जाता है ईसा पूर्व 5076 साल पहले राम ने रावण का वध कर दिया था। वहीँ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के सेवानिवृत्त पुरातत्वविद् डॉ. एलएम बहल का कहना है कि रामायण में वर्णित श्लोकों के आधार पर इस गणना का मिलान करें तो राम-रावण का युद्ध हुआ था। इसी के साथ खगोलीय अध्ययन करने वाले विद्वान का कहना है ईसा पूर्व 5076 साल से पहले से आज तक रावण का शव श्रीलंका की रानागिल की गुफा में सुरक्षित रखा हुआ है और उसे वहां से कोई नहीं बाहर ला पाया।

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