बिहार इस समय कड़कड़ाती ठंड और शीतलहर की चपेट में है। बिहार समेत देशभर में करीब-करीब दिसंबर माह से जनवरी माह के तीसरे सप्ताह तक शीतलहर का प्रकोप रहता है। शीतलहर से मानव और पशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकुल प्रभाव पड़ता है। इस बीच ठंड और शीत लहर से बचाव के लिये अपनी पत्नी और बच्चों (जन साधारण) के लिए यह उपाय करने चाहिए। राज्य वासियों के लिये यह तमाम जानकारियां बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की और दी गई हैं। शीत लहर या ठंड से बचाव के लिये करें यह कार्य 1. आप घर से अनावश्यक बाहर न जायें और ऐसी स्थिति में संभव हो तो आप घर के अंदर ही सुरक्षित रहें। 2. यदि घर से बाहर जाना आवश्यक हो तो समुचित ऊनी एवं गर्म कपड़े पहन कर ही घर से निकलें। बाहर जाते समय अपने सिर, चेहरे, हाथ और को उपयुक्त गर्म कपड़े से ढक लें।
3.समाचार पत्र, रेडियो या टेलीविजन के माध्यम से मौसम की जानकारी समय-समय पर हासिल करते रहें। 4.शरीर में उष्मा के प्रवाह को बनाये रखने के लिये पौष्टिक आहार एवं गर्म पेय पदार्थों का सेवन करें। 5.बंद कमरों में जलती हुई लालटेन, दीया एवं कोयले की अंगीठी का प्रयोग करते समय धुएं के निकास का उचित प्रबंध करें। प्रयोग करने के बाद इन्हें अच्छी तरह से बुझा दें। 6.हीटर, ब्लोअर आदि का प्रयोग करने के बाद स्विच ऑफ करना न भूलें अन्यथा यह जानलेवा हो सकता है। 7.राज्य सरकार शीत लहर के समय रात्रि में सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था करती है। जिसका लाभ उठाकर शीत लहर से बचा जा सकता है। 8. सरकार द्वारा शहरी क्षेत्रों में बेघरों के लिये रैन बसेरों का इंतजाम किया जाता है। 9.उच्च रक्तचाप एवं मधुमेह के मरीज या ह्दय रोगी चिकित्सक की सलाह जरूर लेते रहें व धूप सामान्य होने पर ही घर से बाहर निकलें। 10.विशेष परिस्थिति में नजदीकी सरकारी अस्पताल से तुरंत चिकित्सा परामर्श लें। 11.एंबुलेंस की सहायता लेने के लिये दूरभाष संख्या 102 या 108 पर सम्पर्क करें।
शीत लहर या ठंड लगने पर व्यक्ति में ये लक्षण होते हैं उत्पन्न 1.शरीर का ठंडा होना एवं अंगों का सुन्न पड़ना। 2.अत्यधिक कपकपी या ठिठुरन। 3.बार-बार जी मिचलाना या उल्टी होना। 4.अर्द्धबेहोशी की स्थिति या बेहोश होना।
